
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने अर्बन तथा रूरल कोऑपरेटिव बैंकों के लिए शासन व्यवस्था से संबंधित ढांचे में प्रस्तावित संशोधनों के मसौदे जारी करते हुए, इन पर सार्वजनिक टिप्पणियाँ और सुझाव आमंत्रित किए हैं।
प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, किसी सहकारी बैंक के निदेशक द्वारा अधिकतम दस वर्ष के निरंतर कार्यकाल की अवधि पूरी करने के बाद, उसी बैंक के निदेशक मंडल में पुनर्नियुक्ति के लिए कम से कम तीन वर्ष की अनिवार्य विश्राम अवधि (कूलिंग-ऑफ अवधि) निर्धारित की जाएगी। यह प्रावधान बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 10ए (2ए)(i) सहपठित धारा 56 के अंतर्गत निर्धारित कार्यकाल सीमा के अनुरूप है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के लिए निदेशकों के निरंतर कार्यकाल की अधिकतम सीमा 29 जून 2020 से लागू है, जबकि राज्य सहकारी बैंक और केंद्रीय सहकारी बैंक के लिए यह प्रावधान 1 अप्रैल 2021 से प्रभावी हुआ। इसके बाद बैंकिंग क़ानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 के माध्यम से निदेशकों के अधिकतम कार्यकाल को आठ वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष कर दिया गया, जो 1 अगस्त 2025 से लागू हुआ।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, कुछ मामलों में यह देखा गया है कि निदेशक अल्पकालिक अवधि के लिए इस्तीफा देकर पुनः चुनाव या सह-नामांकन के माध्यम से बोर्ड में स्थान प्राप्त कर लेते हैं, जिससे वे कानूनी रूप से निर्धारित कार्यकाल सीमा से अधिक समय तक निदेशक बने रहते हैं।
इसी समस्या के समाधान के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने मौजूदा शासन निर्देश, 2025 में नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव किया है। मसौदा निर्देशों के अनुसार, जिस निदेशक ने किसी अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, राज्य सहकारी बैंक या केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक मंडल में दस वर्ष का निरंतर कार्यकाल पूरा कर लिया है, वह तीन वर्ष की अनिवार्य विश्राम अवधि पूरी किए बिना उसी बैंक के निदेशक मंडल में पुनः नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।
इस अवधि के दौरान संबंधित निदेशक उस बैंक से सदस्य या ग्राहक के अतिरिक्त किसी भी अन्य क्षमता में संबद्ध नहीं रह सकेगा। हालांकि, यह प्रतिबंध उसे किसी अन्य बैंक के निदेशक मंडल में नियुक्त किए जाने से नहीं रोकेगा।
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि निरंतर कार्यकाल की गणना के लिए तीन वर्ष से कम अवधि के अंतराल को जोड़कर देखा जाएगा, जबकि तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि के अंतराल से पूर्व की सेवा को निरंतर कार्यकाल में शामिल नहीं किया जाएगा।
इन दोनों मसौदा संशोधन निर्देशों पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने 30 जनवरी 2026 तक सार्वजनिक सुझाव और प्रतिक्रियाएं आमंत्रित की हैं। इच्छुक पक्ष भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘कनेक्ट टू रेगुलेट’ अनुभाग के माध्यम से अथवा विनियमन विभाग (शासन अनुभाग), भारतीय रिज़र्व बैंक, मुंबई को डाक या ई-मेल के जरिए अपनी प्रतिक्रियाएं भेज सकते हैं।



