उत्तर प्रदेश के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों का होगा विलय

केरल, छत्तीसगढ़ और पंजाब के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के 50 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों का विलय शीर्ष बैंक उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी बैंक में करने की योजना बना रही है।

इसके लिए राज्य सरकार ने आईआईएम लखनऊ के सहयोगी प्रोफेसर विकास श्रीवास्तव के नेतत्व में रूपरेखा तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस बीच समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

सहकारिता विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह कमेटी बैंकों के विलय की विस्तृत समीक्षा कर खूबियों, कमजोरियों, अवसरों और चुनौतियों को सामने लाएगी। जब समिति अपनी रिपोर्ट पेश करेगी तो इस रिपोर्ट को कैबिनेट कमेटी में रखा जाएगा और विलय प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।

श्रीवास्तव के अलावा, समिति के सदस्यों में सेवानिवृत्त अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी, सेवानिवृत्त सीजीएम नाबार्ड, संयोजक बैंक ऑफ बड़ौदा, लखनऊ, सहकारी सचिव लखनऊ, उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक प्रबंध निदेशक और अन्य शामिल हैं।

इससे पहले, भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के छह डीसीसीबी बैंक का विलय राज्य सहकारी बैंक के साथ करने पर अपनी मंजूरी दी थी। झारखंड में ऐसा पहले ही हो चुका है और केरल में विलय प्रक्रिया चल रही है। सहकार भारती ने केरल के डीसीसीबी बैंकों के विलय करने के मुद्दे पर जमकर हल्ला बोला था लेकिन जब भाजपा की राज्य सरकारों में ऐसा होना शुरु हुआ तो सहकार भारती ने इन मुद्दों पर चुप्पी साध ली।

साथ ही 65 वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए राज्य सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने कहा कि जनवरी तक 1200 सहकारी बैंकों और जिला सहकारी बैंकों की शाखाएं को ऑनलाइन किया जाएगा। बैंकों का आधुनिकीकरण हमारी पहली प्राथमिकता है, उन्होंने जोर दिया।

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन सहकारी संस्थानों को मजबूत बनाने के लिए करीब 12 अरब रुपये का बजट है।

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