यूपी कॉपरेटिव बैंक की नव-निर्वाचित टीम ने काम संभाला

यूपी कॉपरेटिव बैंक ने हाल ही में भाजपा सहकारी नेताओं के गठजोड़ से नई टीम को चुना है। पूर्व सांसद तेजवीर सिंह को बैंक के अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना गया है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह का बेटे जितेंद्र बहादुर सिंह को उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया है।

अन्य सदस्यों में भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह, विधायक विकास गुप्ता और झांसी से पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक जाटव शामिल हैं। चुनाव अधिकारी सूर्यकांत त्रिपाठी ने कहा कि मेरठ से सुश्री कमलेश और अरुणेंद्र का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया।

विजेताओं की सूची में मोरादाबाद से इंदिरा सिंह, मेरठ के सतीश प्रधान, वाराणसी से लोक नारायण, कानपुर से विनोद कुमार पाल, रायबरेली के अनुभाव काकाद, हरदोई के सुरेश द्विवेदी शामिल हैं।

जीत के तुरंत बाद नई टीम ने राज्य के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा से मुलाकात की। वर्मा ने सभी का शॉल और गुलदस्ते से स्वागत करने के लिए धन्यवाद दिया। 

बैंक की नव निर्वाचित टीम ने पिछले शुक्रवार को अपनी पहली बैठक का आयोजन किया और किसानों को तत्काल खरीफ ऋण प्रदान करने पर चर्चा की। बैठक में नाबार्ड को 2900 करोड़ रुपये के ऋण की मांग करने के अनुरोध को स्वीकृति दी गई।

यूपीसीबी के प्रबंध निदेशक आर के सिंह ने कहा कि सहकारी बैंक का लक्ष्य सितंबर के महीने तक जरूरतमंद किसानों को ऋण प्रदान करना है। इसके अलावा, यूपी देश में गन्ना का सबसे बड़ा उत्पादक है और इसलिए यूपी कॉपरेटिव बैंक की यह भूमिका बनती है कि गन्ना किसानों को समय पर ऋण मुहैया कराया जाए।

आपको बता दें कि यूपी कॉपरेटिव बैंक, राज्य के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों का शीर्ष बैंक हैं। बोर्ड में 12 सदस्य शामिल हैं लेकिन 14 उम्मीदवारों ने इन 12 पदों के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। बरेली से एससी/एसटी के लिए आरक्षित सीट के लिए किसी ने भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया था।

इस चुनाव में विपक्षी दल के नेताओं ने भाजपा पर धांधलेबाजी का आरोप भी लगाया है। माउ जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष विनोद पांडे ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रशासन ने उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं दी।

चुनाव पर टिप्पणी करते हुए, भाजपा सहकारिता सेल के प्रभारी एमएलसी विद्यासागर सोनकर ने कहा कि, तेजवीर सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। वह तीन बार सांसद रहे चुके हैं और सहकारी बैंक के भी अध्यक्ष रहे हैं। हमने उन्हें बैंक का अध्यक्ष बनाने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि वह बेहद अनुभवी व्यक्ति हैं"।

पिछले कई महीनों से, राज्य की सहकारी समितियों का चुनाव चल रहा है और इनमें से अधिकतर सहकारी समितियों पर भाजपा ने अपना कब्जा जमा लिया है।

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