सुनील फेसबुकिया सहकारी नेता है: विनय शाही

रमेश चौबे को दोबारा बिहार स्टेट कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने की खबर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बिहार राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष विनय कुमार शाही ने कहा कि “जब बिहार स्टेट कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष पद की दौड़ में हमारी तरफ से कोई उम्मीदवार नहीं था तो यह सवाल कहां से उठता है कि हम चुनाव जीतने में असफल रहे हैं”।

शाही ने कहा कि यह आरजेडी से जुड़े लोगों की रणनीति थी जिसकी कमान सुनील कुमार सिंह ने संभाल रखी थी। शाही ने बताया कि बिस्कोमॉन के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और आरजेडी का उद्देश्य रमेश चौबे से पैसा कमाना था।

इस सोची समझी साजिश को विस्तार से समझाते हुए शाही ने बताया कि “बिहार स्टेट कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष पद के लिए चौबे को मात देने के लिए आरजेडी के दो उम्मीदवार विष्णुदेव राय और विनोद राय को चुना गया था और इस रणनीति के जरिए चौबे को भय कराकर पैसा कमाना था।

जबकि विष्णुदेव राय को शुरुआत में आरजेडी के लोगों ने नाम वापस लेने के लिए कहा था वहीं विनोद राय को आखिरी मिनट तक चुनावी मैदान में डटे रहने को कहा गया था ताकि चौबे से ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाया जा सके। चुनाव का अंतिम फैसला योजनाबद्ध तरीके से चुनाव की सुबह राबड़ी देवी ने लिया, शाही ने बताया।

शाही ने दावा किया कि विशाल गुट किसी भी उम्मीदवार को चुनाव जिताने में सक्षम था। उन्होंने इस संबंध में अमरेंद्र कुमार मुन्ना का हवाला दिया। खगरिया से एक और उम्मीदवार राजेश कुमार को निदेशक के रूप में सर्वसम्मति से हम लोगों ने जिताया था, शाही ने दावा किया।

“आपको सच बताऊ तो, सुनील कुमार सिंह ने भागलपुर से देवेंद्र प्रसाद को ललकारा था कि उन्हें न तो कोई प्रोपोज़र मिलेगा और न ही सेकिंडर लेकिन विजय सिंह ने देवेंद्र सिंह को अपना समर्थन दिया इसके बाद वो निर्वारोध चुने गए”, शाही ने बताया।

“यहां तक कि विजय वत्सयान की जीत जिसकी खुशी सुनील गुट मना रहा है उनका पद से हटना तय है क्योंकि जिस सहकारी समिति का वे प्रतिनिधित्व करते हैं वह कानूनी पेंच में फंसी है और मामला अदालत में चल रहा है”, शाही ने बताया।

“हम पैसों या गुंड़ो का सहारा क्यों लेंगे जब हमने शीर्ष पद के लिए चुनाव ही नहीं लड़ा, शाही ने सुनील और उनकी टीम द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए यह बात कही"।

“हालांकि दिल्ली में लोग सुनील कुमार सिंह को बड़ा सहकारी नेता मानते होंगे लेकिन बिहार में हमे उनकी ताकत का अंदाजा हैं”, शाही ने सुनील को फेसबुकिया सहकारी नेता बताया जिन्हें जमीनी वास्तविकताओं से कोई लेना देना नहीं है।

पाठकों को याद होगा कि हाल ही में रमेश चौबे को बिहार स्टेट कॉपरेटिव बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था और बैंक के शीर्ष पद की सत्ता हासिल करने को लेकर दो गुटों में जमकर आरोपो-प्रत्यारोपों का सिलसिला चल रहा था। बताया जा रहा है कि यह लड़ाई दो सहकारी नेताओं बिस्कोमॉन के अध्यक्ष सुनील सिंह और नेफेड के निदेशक विशाल सिंह के बीच थी।

Comment ( 1 )

  1. विजय वात्स्यायन

    शाही जी का वक्तव्य यह कि, अमरेन्द्र(नालंदा) और देवेन्द्र(भागलपुर) उनके अर्थात विशाल-विजय सिंह गुट के निदेशक उम्मीदवार थे। अध्यक्ष पद का चुनाव उनके गुट ने लड़ा ही नहीं,शाही ये भूल गए कि जिस विनोद कुमार को वो राबडी देवी का उम्मीदवार कहने की ज़ुर्रत कर रहे हैं उस विनोद कुमार के प्रस्तावक समर्थक अमरेन्द्र और देवेन्द्र ही थे अर्थात विनोद शुद्ध रूप से शाही विजय सिंह विशाल गुट के उम्मीदवार थे और शून्य के निकटतर वोट पाकर बुडी पराजित हुए।

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