नया प्रयोग: बैंक आइए, तैयार होइए और पार्टी में जाइए

क्या अपने कभी सुना है कि कोई बैंक हाउसिंग सोसायटी के बेसमेंट में जगह खरीदकर उसमें लॉकर समेत साज-सज्जा की सुविधाएं देती हो ताकि इसके ग्राहक रात में चैन की नींद सो सकें। जी हां ऐसी ही एक नई सुविधा पुणे स्थित विद्या सहकारी बैंक ने शुरू की है।

जब भी हाउसिंग सोसायटी की महिला को पार्टी के लिए जाना होगा तो सीधे सोसायटी के बेसमेंट में आएंगी और यहां बने ड्रेसिंग रूम का उपयोग करेगी और लॉकर में रखे गहनों को पहनकर पार्टी में जाएगी। पार्टी से आने के बाद महिला उन गहनों को वापस अपने लॉकर में रखेंगी और बिना किसी डर के अपने फ्लैट चली जाएगी। देखिए कितना आसान और अनूठा फार्मूला है!

विद्या सहकारी बैंक ने पुणे स्थित बनार की परीजत सोसायटी में “डे एंड नाइट लॉकर सिस्टम” सुविधा की शुरुआत की है। यह लॉकर सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है। सोसायटी के लोगों को ड्रेसिंग रूम, हेयर ड्रायर, नाखून पॉलिश, लिपस्टिक जैसी सभी सुविधाएं एक छत के नीचे प्रदान की जाती है।

“शायद, अर्बन कोऑपरेटिव बैंकिंग सेक्टर में हमारा बैंक पहला बैंक है जिसने इस तरह की अनूठी सुविधा की शुरुआत की है”, विद्या सहकारी बैंक के अध्यक्ष विद्याधर अनास्कर ने गर्व से कहा।

अनास्कर ने इसे अभिनव बैंकिंग बताते हुए कहा कि, इस सुविधा के प्रारंभ से पुलिस का काम भी कम हुआ है क्योंकि लुटेरों को मामूल है कि सोसायटी में कहीं भी नकद और सोना नहीं है। इसमे फ्लैट मालिकों के लिए केवल एक शर्त है कि उनका बचत खाता विद्या सहकारी बैंक में होना चाहिए, अनास्कर ने बताया।

इस सुविधा की महत्वपूर्णबात यहा है कि इसके लिए आरबीआई की अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है।

अनास्कर ने बताया कि विद्या सहकारी बैंक ने एक और नया प्रयोग किया है जिसमें “बुजुर्गों और विकलांगों को दरवाजे पर बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। वे हमें कॉल करते हैं और हमारा प्रतिनिधि उनका पैसा इकट्ठा करके बैंक में जमा कराता है, हम इन लोगों से केवल यात्रा खर्च लेते हैं”, उन्होंने बताया।

“इससे उन बुजुर्गों को फायदा मिला है जो चल नहीं सकते हैं और इस सुविधा के माध्यम से अपने घर से खाते को संचालित कर रहे हैं। हमे इस संदर्भ में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है”, उन्होंने कहा।

अनास्कर ने आगे बताया कि बृहन्मुंबई नगर निगम के अनुसार यदि कोई सोसायटी के बेसमेंट में लॉकर सिस्टम या फिर एयर कंडीशनिंग प्लांट स्थापित करना चाहता है तो इसको बिना किसी किराए के दिया जाता है। इस मामले में, बिल्डर को कोई नुकसान नहीं होता है और इससे लोगों को अतिरिक्त सुविधा मिलती है।

बैंक के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए विद्या सहकारी बैंक के अध्यक्ष ने कहा कि बैंक की स्थापना 1974 में बृहान महाराष्ट्र कॉलेज ऑफ कॉमर्स, पुणे से जुड़े शिक्षकों ने की थी। इस बैंक को खोलने का उद्देश्य छात्रों को प्रैक्टिकल विषयों पर प्रशिक्षित करना था। पुणे में हमारी 13 शाखाएं हैं और हमने पिछले वित्त वर्ष लगभग 3 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है।

“हमने आगंतुकों को बैंकिंग के बारे में शिक्षित करने के लिए बैंक की सभी शाखाओं में टीवी स्थापित किया है। हम बैंक के सदस्यों के लिए भी जागरूकता शिविर का आयोजन करते हैं।“

बैंक चेक बुक, डिमांड ड्राफ्ट और अन्य बैंकिंग प्रक्रियाओं के बारे में स्कूली छात्रों को भी शिक्षा देने में हम सक्रिय है, अनास्कर ने दावा किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Facebook

Twitter