एनसीसीटी: वरिष्ठ वकील कोर्ट में रहे गैरहाजिर

एनसीयूआई की ओर से एनसीसीटी को अपने हाथों में वापस लेने के प्रयासों को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब वरिष्ठ वकील समय पर कोर्ट में गैरहाजिर रहे और कोर्ट ने मामले को गर्मियों की छुट्टी तक टाल दिया। इसी के साथ वरिष्ठ वकील वी.पी.सिंह का यह दावा की पहली सुनवाई में ही हम जीत हासिल कर लेंगे, हास्यास्पद ही साबित हुआ।

भारतीय सहकारिता को पता चला कि एनसीसीटी को एनसीयूआई से अलग करने के मामला पर 26 अप्रैल की शाम को 5.30 बजे सुनवाई के लिए आया। न्यायाधीश चाहते थे कि एनसीयूआई का वकील इस मामले पर बहस करें। लेकिन वरिष्ठ वकील वी पी सिंह जो एनसीयूआई की गवर्निंग काउंसिल के भी सदस्य हैं इस दौरान मौजूद ही नहीं थे। उनके सहायक ने बेंच से मामले में अगली तारीख देने का आग्रह किया और अदालत ने इस मामले को 25 जुलाई तक स्थगित कर दिया।

गवर्निंग काउंसिल के कुछ सदस्य भारतीय सहकारिता से बातचीत में वी.पी.सिंह से नाखुश दिखाई पड़े लेकिन एनसीयूआई के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव अभी भी उनका बचाव करते नजर आए। ''मंत्रालय ने सुनवाई से एक दिन पहले अपना जवाब दिया था जबकि उन्हें 3 सप्ताह का वक्त मिला था। हमारे वकील को जवाब देने से पहले अध्ययन करने के लिए समय चाहिए था”, चंद्रपाल ने वी.पी.सिंह का बचाव करते हुए इस संवाददाता से कहा।

अगली सुनवाई में किसी और वकील को लाने के मामले में यादव ने अपनी प्रतिक्रिया नरम ढंग से दी और कहा -“चलो देखते हैं अगली सुनवाई में क्या होता है। यहां ये बताना उचित होगा कि, एनसीयूआई के वकील के रूप में वी.पी.सिंह को बरकरार रखना एक बहस का मुद्दा बन गया है।

पाठकों को याद होगा कि कृषि मंत्रालय द्वारा एनसीसीटी को एनसीयूआई से अलग करने के मामले में कई सहकारी नेताओं ने जमकर सरकार की आलोचना की थी और वो किसी भी शर्त पर एनसीसीटी को गंवाना नहीं चाहते हैं। उनका मानना है कि इस कदम से सरकार देश में सहकारी आंदोलन को कमजोर करना चाहती है।

एनसीसीटी को शीर्ष सहकारी संस्था एनसीयूआई द्वारा उप-नियम 16 ए के तहत बनाया गया था, उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा।

भारतीय सहकारिता से बातचीत में वी.पी.सिंह ने पहले कहा था कि “एनसीसीटी को भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के उप-नियमों के तहत बनाया गया है और इस पर सरकार का कोई हक नहीं है। एनसीयूआई के वरिष्ठ एडवोकेट होने के नाते मैं इस मुद्दे पर कोर्ट में बहस करूंगा"।

“मुझे उम्मीद है कि अगले 10 दिनों में हमारे हाथ में स्टे आर्डर होगा”, उन्होंने मंत्रालय के आदेश के मद्देनजर भारतीय सहकारिता से बातचीत में कहा था।

इस बीच, सूत्रों का कहना है कि एनसीसीटी ने एक स्वतंत्र निकाय के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया है और अब एनसीसीटी से जुड़ी कोई भी फाइल एनसीयूआई में दस्तक नहीं देती है।

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