इफको ने लुप्तप्राय पौधों की प्रजातियों को बचाने में उठाए कदम

इफको ने लुप्तप्राय पौधों की प्रजातियों को बचाने का जिम्मा उठाया है और उसके प्रयास का एक नमूना इफको के प्रबंध निदेशक डॉ यू.एस.अवस्थी ने आंवला इकाई से शुरुआत करके दिखाया।

इफको के प्रबंध निदेशक की पत्नी श्रीमती रेखा अवस्थी ने बरेली में पहला पौधा लगाया। इस अवसर पर एमडी के अलावा, मार्केटिंग निदेशक योगेन्द्र कुमार, आंवला इकाई के प्रमुख जीके गौतम समेत अन्य लोग शामिल थें।

इफको ने लगभग 50 लुप्तप्राय प्रजातियों को पुनर्जीवित करने के लिए 50 एकड़ जमीन ली है। कई पौधों जो मरने की कगार पर हैं लेकिन औषधीय गुणों से भरपूर है उनको इफको बचाने की कोशिश करेगी।

श्रीमती अवस्थी ने पहले वर्मिलियन पौधा बोया जबकि एमडी डॉ अवस्थी ने कल्पवृक्ष बोया। इस अवसर पर आंवला इकाई की टीम ने कई अन्य पौधों को लगाए। यहां वन के मुख्य संरक्षक एम पी सिंह भी मौजूद थे।

पौधे लगाने की जरूरत पर प्रकाश डालते हुए इफको एमडी डॉ यू.एस.अवस्थी ने अपनी टीम से पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ों को लगाने का आग्रह किया। इससे पहले अवस्थी ने अपने कई ट्वीट में अपने अनुयायियों से प्रत्येक को एक-एक पौधा लगाने को कहा था।

वहीं इफको की इंडियन फार्म फॉरेस्ट्री डेवलपमेंट कोआपरेटिव (आईएफएफडीसी) ग्रामीण लोगों की जीवन शैली को सुधारने के लिए पहले से ही वृक्षारोपण को प्रोत्साहित कर रही है।

इसके अलावा, बरेली में इफको के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए डिविजनल कमिश्नर पी.वी.जगनमोहन ने कहा था कि इफको एमडी की सफलता का श्रेय उनकी पत्नी रेखा अवस्थी को जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक डिविजनल कमिश्नर चाहते थे कि अवस्थी के योगदान के लिए सरकार की ओर से उन्हें पद्मश्री से नवाजा जाए।

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