आईसीएम भोपाल: एमपी राज्य सहकारी संघ ने दिया 5 करोड़ रुपये का नोटिस

एनसीसीटी को एनसीयूआई से अलग करने का मामला कई राज्यों में राज्य सहकारी संघों और सहकारी प्रशिक्षण केंद्रों के बीच विवादास्पद बना हुआ है। हाल ही में मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ ने आईसीएम भोपाल को 5 करोड़ रुपये का किराया नोटिस दिया है।

नोटिस में कहा गया है कि चूंकि प्रशिक्षण केंद्र आईसीएम भोपाल अब नेशनल कॉपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया का हिस्सा नहीं है इसलिए या तो आईसीए भोपाल को किराया देने होगा नहीं तो इसे परिसर खाली करना होगा। 1996-97 में हुए करार की माने तो यह परिसर राज्य सहकारी संघ ने एनसीयूआई को उपयोग करने के लिए दिया था।

दरअस्ल 1991 में राज्य सरकार ने राज्य सहकारी संघ को 4.5 एकड़ की भूमि आवंटित की थी और ये तय हुआ था कि एनसीयूआई के माध्यम से केंद्र 10 करोड़ देकर एक सहकारी प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण करेगी। इस करार में एनसीसीटी और एनसीयूआई को समझौते में शामिल किया गया था। 

यह प्रस्तावित किया गया था कि यह भूमि राज्य सहकारी संघ की होगी जबकि केंद्र सरकार एनसीसीटी-एनसीयूआई के माध्यम से प्रशिक्षण केंद्र और हॉस्टल इत्यादि बनाने का काम करेगी।

भवन के निर्माण के बाद राज्य सहकारी संघ ने एनसीयूआई के साथ 1996-97 में जिस समझौते पर हस्ताक्षर किया उसमें एनसीसीटी का नाम गायब था।

एनसीसीटी के एनसीयूआई से अलग होने के बाद राज्य सहकारी संघ ने इस समझौते को रद्द बताया और कहा कि राज्य सहकारी संघ को तो एनसीसीटी से कोई करार है ही नहीं। दिलचस्प बात यह है कि जो हॉस्टल एनसीयूआई ने अपने उपयोग के लिए बनाया था लेकिन इसके एक हिस्से को माखनलाल चतुर्वेदी पत्राचार संस्थान को किराए पर दे दिया गया था।

ऐसा कहा जाता है कि इस सब के पीछे राज्य सहकारी संस्था के प्रबंध निदेशक रितु राज रंजन का हाथ है जो कि अपने बॉस को खुश करने के चक्कर में लगे हैं। भोपाल आईसीएम के कुछ लोगों का कहना है कि मंत्री विश्वास सांरग भी पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए आईसीएम भोपाल कानूनी परामर्श लेने में लगा है। भोपाल आईसीएम का दावा है कि मूल समझौता(1976) राज्य सहकारी संघ और एनसीसीटी के बीच हुआ है। 

नाम न छापने की शर्त पर आईसीएम के कुछ संकाय सदस्यों ने कहा कि, “राज्य सहकारी संघ ने हॉस्टल को बाहर के लोगों को किराया पर दे रखा है जबकि इसे आईसीएम के लिए विकसित किया गया था। आज आईसीएम को निजी आधार पर हॉस्टल लेने के लिए खर्च करना पड़ता है।

आईसीएम के लोगों का कहना है कि 4.8 एकड़ जीमन शिक्षा के लिए दी गई थी लेकिन राज्य सहकारी संघ यह जीमन बिना किसी कानूनी अनुमति के शादी समारोह के लिए अक्सर दिया करती है। “यह शर्मनाक है क्योंकि एमडी और अध्यक्ष दोनों सरकारी अधिकारी हैं; वे राज्य सरकार के मानदंड़ों का खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं”, उन्होंने कहा।

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