सहकारिता चुनाव: उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज की

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में राज्य की प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के चुनाव से संबंधित लगभग आधा दर्जन याचिकाओं को खारिज कर दिया है और इन समितियों की चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने के आदेश दिये हैं। उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को ये निर्देश दिया है।

इस संवाददाता से बातचीत में राज्य में सहकारी चुनाव पर भाजपा की ओर से गठित एक समिति के सदस्य दान सिंह रावत ने कहा कि, “चुंकि याचिकाएं चुनाव प्रक्रिया के समापन के बाद दायर की गई है इसलिए इन्हें सुप्रीम कोर्ट के एन पी पुन्नस्वामी के मामले में दिए गए निर्णय का उल्लंघन माना गया। रावत ने उच्च न्यायालय के सामने रखे गये प्रमुख तर्क को साझा करते हुए ये बात कही।

पाठकों को याद होगा कि उधमसिंह नगर जिले के पांच पैक्स समितियों के बोर्ड सदस्यों ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और भाजपा सरकार के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि भाजपा नेताओं ने चुनाव जीतने के लिए मानदंडों और कानूनों का उल्लंघन किया है।

"राज्य के उधमसिंह नगर जिले में 34 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां हैं, जिनमें से 28 सोसायटियों का चुनाव पहले हो चुके हैं इनमें से बीजेपी ने 27 सोसायटी का चुनाव जीता हैं और शेष एक सोसायटी का चुनाव अन्य के खाते में गया है”।

दान सिंह रावत ने आगे कहा, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि शेष बची पांच समितियों का चुनाव 15 सितंबर तक खत्म हो जाएग और हम इन सोसायटियों का चुनाव जीतने का प्रयास कर रहे हैं।"

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद, खंडपीठ ने इस मामले में दायर याचिकाओं को खारिज  किया है, रावत ने दावा किया।

चुनाव में आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला चरम पर है। आपको बता दें कि हाल में संपन्न पैक्स चुनावों में भाजपा ने दावा किया था कि उसने सबसे अधिक सीटें जीती है लेकिन कांग्रेस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनके खाते में केवल 40 प्रतिशत सीटें गई हैं।

अगले चरण में राज्य में स्थित 10 जिला सहकारी बैंक और 13 राज्य स्तरीय शीर्ष सहकारी संघ का चुनाव होगा।

इससे पहले,  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 30 जुलाई तक राज्य की सहकारी समितियों के चुनावों पर अंतरिम रोक का आदेश दिया था और राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

भारतीय सहकारिता को पता चला कि पैक्स सोसायटी से सीधे या परोक्ष रूप से 15 लाख से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। सत्ता संभालने के बाद, भाजपा सरकार ने इन सोसायटी का नाम बदलकर मल्टी पर्पस कॉपरेटिव सोसायटी रख दिया है। उल्लेखनीय है कि बीजेपी के सत्ता में आने से पहले ज्यादातर पैक्स पर कांग्रेस का कब्जा था।

 

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