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किसानों की मदद करना इफको के डीएनए में है: अवस्थी

कोरोना लड़ाई में इफको टीम पहुंची 1400 लोकेशन पर

संकट की इस घड़ी में भारत के किसान अपना सर्वोत्तम योगदान देते हुए खाद्य भंडार के स्तर को अधिकतम बनाए रखने के लिए अपना पसीना बहा रहे हैं ताकि इस कठिन समय में इतनी बड़ी आबादी को भोजन मिलता रहे। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए इफको ने यह सुनिश्चित किया कि हमारे किसान समुचित संसाधनों से लैस हों।

अपने कर्मचारियों में सोशल डिस्टेंसिंग दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करते हुए इफको ने अपने पांचों संयंत्रों कलोल, कांडला, आंवला, फूलपुर और पारादीप को चालू रखा है। इफको के क्षेत्र अधिकारी और वितरण नेटवर्क अपनी सदस्य सहकारी समितियों और इफको बाजार के आउटलेट के माध्यम से किसानों को पौध पोषण उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त सावधानी के साथ काम कर रहे हैं, इफको द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक।

इसके अलावा, इफको किसानों के बीच स्वच्छता अभ्यास और सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में जागरूकता फैला रही है ताकि संक्रमण की कड़ी को तोड़ा जा सके।

अपनी राष्ट्रव्यापी पहुँच और लगभग 35,000 सदस्य सहकारी समितियों के विशाल नेटवर्क का लाभ उठाते हुए इफको ने ‘ब्रेक द कोरोना चेन’ अभियान की शुरूआत की। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को संक्रमण के बारे में शिक्षित करना, उन्हें मास्क और सैनिटाइज़र से लैस करना तथा स्वच्छता और सोशल डिस्टेंसिंग के संदेश का प्रसार करना था। इसके तहत 1400 से अधिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनके जरिए लगभग 6.5 लाख लोगों को फायदा मिला।

इफको की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने इस बारे में कहा कि; इफको एक सहकारी संस्था है और जरूरत के समय में समुदाय की सहायता के लिए आगे आना हमारा कर्तव्य है और हमारे संगठनात्मक डीएनए का हिस्सा है। उन्होंने आगे कहा कि हमने अपनी पूरी विपणन टीम, अपनी समूह कंपनियों और पूरे इफको इकोसिस्टम को एकजुट किया है।

“भारत भर में इफको के 400 से अधिक क्षेत्र अधिकारी हैं जिनके अधीन कुछ जिले और क्षेत्र आते हैं। प्रशिक्षण और राहत वितरण की जिम्मेदारी के साथ मोर्चे पर लड़ रहे हमारे ये क्षेत्र अधिकारी कोरोना वारियर’ हैं। व्हाट्सएप जैसे ऑनलाइन माध्यम से ये किसानों और समुदाय तक पहुंच रहे हैं। साथ ही राहत वितरण शिविरों, जागरूकता शिविरों आदि के माध्यम से भी वे किसानों से संवाद कर रहे हैं”, अवस्थी ने कहा।

अपनी अनूठी सामुदायिक एकजुटता और शैक्षणिक दृष्टिकोण की बदौलत इफको के इन कोरोना वारियर्स’ ने देश भर में विभिन्न स्थानों पर अब तक लगभग 15 लाख विटामिन-सी की गोलियां, 3 लाख मेडिकेटेड साबुन, 3 लाख मास्क, 52,000 सैनिटाइजर, 10,000 दस्ताने और बड़ी संख्या में मेडिकल किट वितरित किए हैं।

इसके अलावा इफको के विशाल वितरण नेटवर्क का उपयोग करते हुए देश के दूरस्थ क्षेत्रों में जरूरतमंदों के बीच 3 लाख खाद्य पैकेट और 30,000 राशन किट वितरित किए गए हैं ।

इस अभियान का नेतृत्व कर रहे इफको के विपणन निदेशक योगेन्द्र कुमार ने कहा कि “हमने अनेक मोर्चों पर प्रयास किए हैं। किसानों को सीधे प्रशिक्षित किया जा रहा है। क्षेत्र में स्वच्छता और सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के संदेश का प्रचार करने हेतु हम स्थानीय राजनेताओं, अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों जैसे स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर के प्रभावशाली लोगों की मदद भी ले रहे हैं।

इफको की सामुदायिक भागीदारी का उदाहरण असम और उत्तराखंड में देखा जा सकता है जहां इफको द्वारा अपने ग्रामीण आजीविका विकास कार्यक्रम के तहत पिछले कुछ वर्षों के दौरान दूर-दराज के क्षेत्रों में विकसित किए गए अनेक महिला स्वयं सहायता समूहों को एकजुट किया गया । इन स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कपड़े से मास्क बनाने का प्रशिक्षण दिया गया और इन महिलाओं
द्वारा बनाए गए 10,000 मास्क को हमारे क्षेत्र की टीम द्वारा पूरे राज्य में वितरित किया गया।

प्रधानमंत्री ने भी सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए समुदायों से आपस में मेल-जोल बढ़ाने और एक दूसरे से सहयोग करने की अपील की है।

जमीनी स्तर पर किए गए इन प्रयासों के अलावा इफको ने पीएम-केयर्स फंड में 25 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट के जरिए इफको के इस कदम की सराहना भी की है।

ये कुछ ऐसे कदम हैं जो इफको द्वारा भारत के ग्रामीण हिस्सों में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में योगदान देने के क्रम में उठाए जा रहे हैं । इन प्रयासों के जरिए कृषि क्षेत्र के महत्व और इस विकट समय में भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान को रेखांकित किया गया है।

यह उम्मीद की जाती है कि भारत में कार्यबल राहत की दिशा में, विशेषकर कोरोना संकट के दौरान, होने वाली हरेक चर्चा और प्रयास में भारत की आधी से अधिक आबादी को रोजगार देने वाले कृषि क्षेत्र को अवश्य ध्यान में रखा जायेगा।

इफको ने भारत के अन्य कॉर्पोरेट्स और कंपनियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया है जो ग्रामीण भारत में कोरोना वायरस की कड़ी को तोड़ने की दिशा में योगदान करना चाहते हैं। ऐसे समय में जब लाखों मजदूर शहरों से अपने गांव-घर वापस लौट रहे हैं, यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

 

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