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को-ऑप विकास पर लीनाक का प्रशिक्षण

सहकारी प्रशिक्षण को प्राथमिकता देते हुए, सहकारी ऋणदाता “राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम” (एनसीडीसी) द्वारा स्थापित नेशनल एकेडमी फॉर कोऑपरेटिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट (लीनाक) ने नई दिल्ली में एनसीडीसी के मुख्यालय में  “उभरते प्रौद्योगिकी और सहकारी विकास के लिए नए क्षेत्र” पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला का उद्घाटन आईसीएआर के डीडीजी (कृषि विस्तार) -डॉ ए के सिंह ने किया, जिन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। एनसीडीसी के एमडी सुदीप नायक एवं इफको, एपीडा, एनसीयूआई, एनसीडीसी, फिशकॉफेड के 15 वरिष्ठ अधिकारी समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

सुदीप नायक ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य नई उभरती प्रौद्योगिकियों और व्यापक थीम क्षेत्रों जैसे कृषि, मत्स्य  पालन, डेयरी, वित्त, आईटी अनुप्रयोग, कृषि इंजीनियरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणन और कृषि रसद के साथ प्रतिभागियों को परिचित करना है।

अपने मुख्य भाषण में, डॉ ए के सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और सभी पहलुओं पर ज्ञान प्राप्त करने के लिए देश भर में फैले आईसीएआर संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ सहयोग करने के लिए एनसीडीसी से आग्रह किया। “मैं इस संबंध में एनसीडीसी की मदद करूंगा”, उन्होंने कहा।

विज्ञान तेजी से विकास कर रहा है और प्रौद्योगिकी प्रत्येक समस्या का एकमात्र समाधान है। हालांकि हमारे देश में उत्पादन मुद्दा नहीं है, लेकिन हम उत्पादक प्रणाली में कैसे विविधता लाते हैं, यह बहुत चुनौतीपूर्ण है।

सिंह ने आगे कहा कि पालतू जानवरों के लिए चारा उगाने के लिए हाइड्रोपोनिक खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मत्स्य क्षेत्र के लिए नए तरीकों का आविष्कार करने की आवश्यकता है। ‘एक्वाकल्चर’ उत्पादन को फिर से देखना उनमें से एक है। इसी तरह, कृषि में सूक्ष्म जीवों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए और रासायनिक उर्वरक का उपयोग कम होना चाहिए।

भारत में चावल, गेहूं, चीनी और अन्य फसलों का अधिक उत्पादन होता है जिसे अन्य विविध फसलों में बदलने की आवश्यकता है। सिंह ने कहा, “इस बीच, हम अपशिष्ट जल उपचार पर काम कर रहे हैं, जिसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है।”

सुदीप नायक ने अपने भाषण में प्रतिभागियों को कार्यशाला के बारे में बताया और कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

देश भर में फैले एनसीडीसी के क्षेत्रीय कार्यालयों ने भी स्काइप के माध्यम से इस कार्यक्रम में भाग लिया।

लीनाक के सलाहकार सतीश टकर ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

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