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सहकारिता आंदोलन समय की मांग है: राष्ट्रपति

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा आयोजित 16 वें भारतीय सहकारी कांग्रेस का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी के मंगलवार को राजधानी में किया। हाई वोल्टेज समारोह की अध्यक्षता कृषि मंत्री श्री शरद पवार ने की। देश भर में और विदेशों से करीब 2000 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस समारोह में भाग लिया।

राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के परिवर्तन की दिशा में सहकारी क्षेत्र द्वारा किए गए योगदान की सराहना की और उन्होंने जोर देकर कहा कि सहकारी समितियों की भूमिका पहले की तुलना में वर्तमान में कई गुना बढ़ गई है।

सहकारिता ने केवल अपने सदस्यों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में एक सार्थक भूमिका नही निभाई है, बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक एकता के लिए उत्प्रेरक के रूप में भी अपना योगदान दिया है, श्री मुखर्जी ने कहा।

राष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की है कि 16वें भारतीय सहकारी कांग्रेस में विचार विमर्श करके और अधिक बेहतर, अधिक न्यायसंगत और अधिक सुरक्षित दुनिया के लिए सहकारी क्षेत्र में सुधार करेंगे, जिससे स्थाई रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सभी सहकारी सेक्टोरल क्षेत्रों में फैली सफलता की कहानी एवं सूचना का अधिकार और सहकारिता पर एक किताब का प्रकाशन जारी किया।

केन्द्रीय कृषि और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री शरद पवार ने अपने संबोधन में देश में सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए उचित नीति और अनुकूल माहौल बनाने के लिए विधायी ढांचा विकसित करने के लिए भारत सरकार के प्रयासों के बारे में बताया। श्री पवार ने कहा कि 97वाँ संवैधानिक संशोधन अधिनियम सहकारिता को एक मौलिक अधिकार के रूप में सुनिश्चित करता है। उन्होंने स्थायी सहकारी विकास के लिए प्रभावी रूप से भाग लेने के लिए राज्यों से आह्वान किया।

इस अवसर पर मौजूद दिल्ली के मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने कृषि ऋण, आवास, चीनी, दूध, पर्यटन, मत्स्य, कताई और उर्वरक जैसी सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के लगभग सभी क्षेत्रों में सहकारी समितियों के योगदान की सराहना की। श्रीमती दीक्षित ने महिला सहकारिता को विकसित करने और सहकारी संस्थाओं में युवाओं की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया।

एनसीयूआई के अध्यक्ष डॉ. चन्द्र पाल सिंह ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस से भारत में सहकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी छवि का निर्माण करने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब सहकारी समितियाँ बाजार अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है।

हालांकि, सहकारी समितियों को उनकी योग्यता पर पूरी तरह से विश्वास हैं, सम्मानित अतिथि आईसीए की अध्यक्ष सुश्री डेम पॉलीन ग्रीन ने भारतीय सहकारिता आंदोलन के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सहकारी क्षेत्र ने वैश्विक वित्तीय संकट के बावजूद उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है।

16वें सहकारी कांग्रेस का विषय ‘’सहकारी उद्यम एक बेहतर दुनिया का निर्माण’’ है। कांग्रेस में सहकारी क्षेत्र की प्रगति और क्षेत्र में आने वाली आकस्मिक समस्याओं के लिए प्रभावी नीति के लिए दिशा निर्देशों की समीक्षा की गई।

देश में 6 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं। सहकारी समितियाँ 100% गांवों और 75% ग्रामीण घरों को कवर करती है। दूध सहकारी समितियों के महत्वपूर्ण योगदान के कारण भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। अमूल, इफको और कृभको सहकारी क्षेत्र में सबसे बड़ी सफलता की कहानी है।

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