विधि एवं विधेयक

97वें सीएए पर महाराष्ट्र में लेजिस्लेटिव अव्यवस्था की भरमार

गैर सहायता प्राप्त सहकारी समितियों के मामलों में संसद की निर्णायक दिशाओं को देखते हुए महाराष्ट्र ने विधायी अव्यवस्था के विरुद्ध युद्ध स्तर पर हस्तक्षेप किया है।

ऐसा लगता है जल्दबाजी में महाराष्ट्र राज्य आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार द्वारा महाराष्ट्र में सहकारी समितियों के सभी संभागीय और जिला उपपंजीयकों को 22-02-2013 को सलाह जारी की गई है।

ऐसा लगता है कि आयुक्त श्री मधुकर चौधरी (आईएएस) के द्वारा 15-02-2013 को सरकार की तरफ से पत्र के रुप में सलाह जारी की गई है।

रजिस्ट्रार द्वारा 14-02-2013 को जारी महाराष्ट्र सहकारी (संशोधन) अध्यादेश 2013 के तहत एमसीएस अधिनियम 1960 के संशोधित धारा 14 के तहत उपनियम कानून में संशोधन करने के लिए सहकारी समितियों को निर्देशित करने का अधिकार दिया गया है।

यह सलाह धारा 14 के तहत नही है। यह नए उपनियम को अपनाने के लिए संबंधित वार्ड अधिकारियों के माध्यम से सभी सहकारी समितियों पर दबाव बनाने के लिए एक आंतरिक अनुदेश है।

वेबसाइट www.societywiki.com पर रिपोर्ट को के-पश्चिम वार्ड में सभी सहकारी आवास समितियों के उपपंजीयक, सहकारी समितियां, के-पश्चिम वार्ड, मुंबई द्वारा नई उपनियम को अपनाने के लिए 31.5.2013 तक का ही समय दिया गया है।

सहकारी सोसायटी के पंजीयक द्वारा अनुमोदित संशोधित उपनियम को 30.04.2013 पर या इससे पहले मौजूदा उपनियम के स्थान पर अपनाये जाने की जरुरत हैं जिसके लिए एक विशेष आम सभा की बैठक बुलाने की जरूरत है। इस तरह की विशेष आम सभा की बैठक के लिए एजेंडा मॉडल उपनियम कानून को अपनाने के लिए किया जाएगा।

वर्ष 2012-2013 के लिए सोसायटी की पुस्तकों के ऑडिट के लिए एक लेखा परीक्षक और उसके पारिश्रमिक को फिक्स करने के लिए यह जरुरी है कि लेखा परीक्षक सरकार विभाग द्वारा बनाए पैनल में से एक होना चाहिए।

एक लेखा परीक्षक अधिक से अधिक तीन साल के लिए लगातार एक ही सोसाइटी के खातों को ऑडिट नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा कोई भी लेखा परीक्षक एक वर्ष में 20 से अधिक समितियों के ऑडिट का संचालन नही कर सकते हैं। हालांकि, इस उद्देश्य के लिए समितियों की संख्या की गणना में 1 लाख रुपए से भी कम शेयर पूंजी वाले सोसायटी शामिल नहीं किये जायेंगे।

31.05.2013 से पहले मॉडल उपनियम को अपनाने के लिए प्रस्ताव दाखिल करना आवश्यक है।

यदि प्रबंध समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया है या अगले छह महीने के भीतर समाप्त हो रहा है वहां सोसायटी को तुरंत ऊपर दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।

इन निर्देशों को उप पंजीयक देने में k-वेस्ट, नई धारा 77I (2) एमसीएस अधिनियम 1960 की धारा 77A कि अनदेखी की गई है, जिन समितियों के शर्तों की अवधि समाप्त हो गई हो, कानूनी तौर पर ऐसे सदस्य तत्संबंधी समिति के पदाधिकारी नहीं रह सकते हैं। एक साधारण सदस्य द्वारा बुलाई गई विशेष आम सभा की बैठक कानूनी बैठक के रूप में स्वीकार कर ली जाएगी या नही इस पर कोई विचार नही किया गया है।

ऐसे परामर्श 97वें संवैधानिक संशोधन के उद्देश्यों को पूरा करने में कहाँ तक सहायक होते है?

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