डेयरीविशेष

अमूल: सोढ़ी का प्रवेश, व्यास की गाथा समाप्त

ऐसा लग रहा है कि अमूल में बी.एम. व्यास नामक वृतांत श्री आर.एस. सोढ़ी की जीसीएमएमएफ में प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्ति और नियमित होने के साथ ही खत्म हो गई. श्री सोढ़ी अमूल के एक पुराने कार्यकर्ता हैं और अध्यक्ष श्री पारथी भटोल का हर स्थिति साथ दिया है. वह पिछले सात महीनों से प्रबंध निदेशक के रूप में स्थानापन्न थे.

व्यास के नाटकीय निष्कासन से अचानक जीसीएमएमएफ में एक असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है. हालांकि परथी भाई ने हालात को बहादुरी से संभाला और कहा कि सब कुछ नियंत्रण में है. उनका यह भी कहना था कि उन्हें सोढ़ी की क्षमता पर बहुत भरोसा था जिससे कि वह स्थिति पर आसानी से काबू पा सके.

व्यास का इस्तीफा पारथी भाई को फंसाने के लिए एक चाल थी, लेकिन वह खुद ही फंस गए. यह भी सर्वविदित है कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को संगठन के विकास के साथ-साथ चलना पड़ता है. अमूल जैसे संगठन कॉरपोरेट सहकारिता की श्रेणी में आते हैं जिन्हें लोकतांत्रिक आदर्शों का ध्यान रखने के साथ-साथ उत्कृष्टता भी हासिल करनी पड़ती है.

जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री में ठन जाती है तो इसका खामियाजा राष्ट्र को भुगतना पड़ता है . यही स्थिति एक संगठन के साथ भी है.

विपुल चाई और उनकी टीम द्वारा पिछले सात महीनों में  बहुत सारे व्यवधान उपस्थित करने के बावजूद भी जीसीएमएमएफ में प्रबंध निदेशक के पद पर नियुक्ति के लिए उपयुक्त व्यक्ति की तलाश हेतु एक समिति गठित की गई थी.  स्थानापन्न  एम.डी. का पद पर नियमित होना शुरू में मुश्किल लग रहा था.

लेकिन धीरे – धीरे पारथी  भाई ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली और उनकी कोशिश रंग लाई. श्री आर एस सोढ़ी की नियुक्ति से जीसीएमएमएफ मे परथी भाई की बढ़ रही ताकत प्रमाणित हो गई है.

जीसीएमएमएफ एक आशापूर्ण वर्ष की कामना कर सकता है क्योंकि  एक लंबे समय के बाद अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सद्भाव और सहयोग के वातावरण में  काम कर सकते हैं.  यह  सहकारिता के आदर्शों की जीत है!

Show More

Related Articles

Back to top button
Close