सहकारिता में ईमानदारी जरूरी: सहकार भारती अध्यक्ष

“सहकारी समितियों के कामकाज में ईमानदारी की संस्कृति को सहकारी नेताओं में प्रोत्साहित करना हमारा लक्ष्य है; हम यहां पारदर्शिता स्थापित करने के लिए हैं, सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योतिंद्र मेहता ने दिल्ली में आयोजित सहकार भारती सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा।

सम्मेलन का आयोजन रविवार को दिल्ली में एनडीएमसी ऑडिटोरियम में किया गया। सहकार भारती के अध्यक्ष ज्योतिंद्र मेहता जो नेफकॉब एजीएम में व्यस्त थे, मेहमानों के आगमन के बाद स्थल पर पहुंचे थे। इस मौके पर आरएसएस के वरिष्ठ नेता बजरंग लाल, भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव श्रीमती उपमा श्रीवास्तव, खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञ सुबोध जिंदल और कई सहकार भारती के अधिकारी मौजूद थे।

सभा को संबोधित करते हुए ज्योतिंद्र मेहता ने कहा कि सहकारी समितियां की भूमिका कृषि क्षेत्र में दो प्रमुख क्रांतियों में सहरानीय रहा है। इफको, कृभको और क्रेडिट सहकारी समितियों ने हरित क्रांति और अमूल ने श्वेत क्रांति में अहम भूमिका निभाई है, उन्होंने रेखांकित किया।

सहकार भारती के संस्थापक लक्ष्मणराव इनामदार को याद करते हुए मेहता ने कहा कि उनके कहने पर ही “बिना सहकार नहीं उद्धार” के नारे को ही “बिना संस्कार नहीं सहकार” नारे में जोड़ा गया।

सहकारी संस्था और कंपनी के बीच में अतंर बताते हुए मेहता ने कहा कि “अगर अंबानी अपनी कंपनी के साथ कुछ भी करते हैं तो वह ऐसा कर सकते हैं लेकिन ज्योतिंद्र मेहता अपने सहयोगियों की मरजी के बिना कुछ नहीं कर सकता क्योंकि वह निर्वाचित व्यक्ति है। किसी कंपनी में अपने शेयर के आधार पर मतदान का अधिकार होता है, लेकिन सहकारी समितियों में शेयर चाहे कितना बड़ा-छोटा हो, आपके पास सिर्फ एक वोट है, उन्होंने कहा।

मेहता ने इस मौके पर गांधीधाम के आदिपुर का उदाहरण दिया और कहा कि वहां सहकारी मॉडल की ताकत का एक नमूना देखने को मिलता है।

हाल ही में सहकारिता विभाग का कार्यभार संभालने वाली श्रीमती उपमा श्रीवास्तव ने थोड़े समय में ही सहकारी समितियों का उचित ज्ञान हासिल कर लिया है। “मुझे सहकार भारती के बारे में नहीं पता था लेकिन मैं सहकारिता के बारे मेंपहले से ही जानती थी”। “बिना संस्कार नहीं सहकार” के नारे से वह  काफी प्रसन्न हुई और कहा कि सहकारी समितियों को इस सिद्धांत का पालन करना चाहिए।

अमूल या इफको अगर सफल सहकारी समितियों के रूप में उभरी है तो केवल सहकारी सिद्धांतो के कारण, श्रीमती श्रीवास्तव ने रेखांकित किया। यह किसी भी आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए सबसे अच्छा मॉडल है, उन्होंने कहा।

श्रीवास्तव ने इस मौके पर विज्ञान भवन में 21 सिंतबर को होने वाले इनामदार शताब्दी समारोह के बारे में भी विस्तृत जानकारी साझा की और प्रतिभागियों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

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Comment ( 1 )

  1. subhash narayan gunjkar

    even though cooperative movement is at peak in maharashtra there is lot of space for work in the field of coopertative, because this movement is hammpered by corruption. By handing over this movement in safe hands , it can be saved.

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