एनसीयूआई: एनसीसीई का नीली क्रांति में योगदान

देश की सहकारी संस्थाओं की शीर्ष संस्था एनसीयूआई की शिक्षा विंग एनसीसीई ने हाल ही में मत्स्य सहकारी समितियों के अध्यक्ष और निदेशकों के लिए 'नेतृत्व विकास कार्यक्रम' का आयोजन किया था।

इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 50 से ज्यादा प्रतिभागियों ने भाग लिया और इसका आयोजन दिल्ली स्थित एनसीयूआई मुख्यालय में किया गया।

इसका उद्देश्य प्रतिभागियों के प्रबंधकीय कौशल में सुधार और मत्स्य सहकारी समितियों के समाने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों के बारे में जगरूकता उत्पन्न करना था।

उल्लेखनीय है कि मत्स्य क्षेत्र को किसानों की आय दोगुना करने के एक साधन के रूप में देखा जाता है।

नीली क्रांति पर प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री के द्वारा विशेष बल देने को ध्यान में रखते हुए एनसीयूआई अपना थोड़ा सा योगदान देने में उत्सुक है। हम समय-समय पर मत्स्य पालन क्षेत्र में शामिल लोगों को प्रशिक्षण देते है, एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी एन.सत्यानारायण ने भारतीय सहकारिता को बताया।

अपने उद्घाटन संबोधन में, एनसीसीई के निदेशक डॉ वी.के.दूबे ने कहा कि मत्स्य पालन, सहकारी क्षेत्र की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने मत्स्य सहकारी समितियों से नई रणनीतियों को अपनाने के लिए कहा ताकि वे अपने समकक्षों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें।

अपने संबोधन में फिशकोफॉड के प्रबंध निदेशक बी.के.मिश्रा ने कहा कि मत्स्य पालन का विकास डाटाबेस बनाकर किया जा सकता है जिससे मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से आवश्यक जानकारी प्रदान की जा सके।

डॉ ए.आर.श्रीनाथ, उप निदेशक, एनसीयूआई ने कार्यक्रम का समन्वय किया।

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