उत्तर प्रदेश में सहकारी आवास निर्माण वित्त निगम से परेशानी

अजय कामथ

मेरा नाम अजय कामथ है, और मैं केरल से हूँ। मैं कसारगोद सहकारी शहर बैंक लिमिटेड में काम कर रहा हूँ। इसमें शामिल होने की तिथि 12 फरवरी 2009 है।

मैं एक सॉफ्टवेयर डेवलपर हूँ और सहकारी बैंकों में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है, मैं अन्य किसी कंपनी में शामिल होने के उद्देश्य से एक लंबी छुट्टी चाहता हूँ। मेरा मानना है कि सहकारी बैंकों के द्वारा केवल राजनीतिक काम ही किए जाते हैं, वे बहुत ज्यादा शिक्षित  नहीं है और फिर भी वे एक कुशल प्रबंधन का दावा करते है।

मैं तंग आ गया हूँ। मैं मेरे चचेरे भाई की सॉफ्टवेयर कंपनी में शामिल होना चाहता हूँ। उसके लिए कोई प्रावधान है?

आई सी नाईक

रोजगार को छोड़ना अनुबंध का हिस्सा होता है और यह अधिकार नहीं विशेषाधिकार है। इसलिए छुट्टी लेना मालिक के काम की ज़रूरत पर निर्भर करता है वह छुट्टी से इनकार भी कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह होगी कि आप  समय बर्बाद किए बिना हट जाइए। यदि आपके पास अप्रयुक्त छुट्टियाँ है तो कुछ नियमों के तहत कुछ नकदी की उम्मीद की जा सकती है।

 

पायल राय

मेरा नाम पायल राय है, मेरे पिता ने सहकारी आवास निर्माण वित्त निगम, उत्तर प्रदेश सहकारी आवास संघ 1989-1990 लिमिटेड से 87,000 रुपए लिया था। हमने 2000 तक 100000 रुपए जमा कर दिए।

अब मेरे पिता नहीं रहे और वह हमारे साथ लेन-देन भी नहीं कर सकते। अचानक हमें सोसायटी से नीलामी का नोटिस मिला है।

सौभाग्य से हमें हमारे पिता की ओर से जमा राशि की रसीद मिल गई।

महोदय, कृपया सुझाव दें कि हमें इस मामले में कैसे आगे बढ़ना चाहिए, हमें इसका पर्याप्त अनुभव नहीं है।

आई सी नाईक

ऋणदाता को नोटिस में देय राशि का पूर्ण विवरण देना होता है। अदालत से डिक्री के बिना नीलामी आयोजित नहीं की जा सकती है। सहकारी आवास निर्माण के ईवीएम वित्त निगम से सटीक देय राशि की जानकारी के लिए अनुरोध किजिए।

मुझे नहीं लगता कि आपको इसके बारे में बहुत ज्यादा चिंता करने की जरूरत है। अंत में जो राशि बची है उसका भुगतान करना होगा और मुझे यकीन है कि यह ज्यादा नहीं होगी।

आप स्थगन और भुगतान अनुसूची के पुनर्गठन और ब्याज  पर आंशिक /पूर्ण छूट के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए घबराए बिना इस स्थिति से निपटने की कोशिश करें।

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Comment ( 1 )

  1. tribhuan prasad

    why multi- state co-oprative construction socities are not mentioned in varios scheams gauide line of central government as working agency .except only rojgar gauranty yojna

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