आरएसएस प्रमुख ने सहकारी कार्यक्रम में शिरकत की

पिछले सप्ताह गुरूग्राम में एनसीडीसी-सहकार भारती द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस सरसंघचालक श्री मोहन भागवात द्वारा सहकारी क्षेत्र पर कही गई बातों से साफ झलक रहा था कि भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों एक ही परिवार से हैं। भागवत की शैली अलग हो सकती है लेकिन संदेश एक ही था कि सहकारी क्षेत्र में दिखावा करने के बजाय अपने आप को सहकारी आंदोलन के लिए समर्पित करें।

" इस काम को करते हुए आपको अहंकारभाव से भी बचने की जरूरत है  क्योंकि सच्चे कॉपरेटर का काम जरूरतमंद लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करके आत्मनिर्भर बनाना होता है”, श्री भागवत ने सहकार भारती के सैकड़ो कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा।

श्री भागवत सहकार भारती के संस्थापक लक्ष्मणराव इनामदार की यादगार में एनसीडीसी के प्रशिक्षण केंद्र का नाम बदलकर लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय अकादमी फॉर कॉपरेटिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। जानकार सूत्रों के मुताबिक इस  प्रशिक्षण केंद्र का कायाकल्प कर इसे विश्वस्तरिय बनाने की योजना है।

सरसंघचालक ने सहकार भारती को इनामदार पर बोलने के लिए अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया, जिसके साथ उन्हें प्रान्त प्रचारक के रूप में काम करने का मौका मिला था जब इनामदार खुद क्षेत्र प्रचारक थे। “संघ के साथ काम की व्यस्तता ने ही मुझे अब तक उनको श्रद्धांजलि देने से दूर किया था और मैं इसके लिए सहकार भारती का आभारी हूं, उन्होंने कहा।

“मैं उन्हें अच्छी तरह से जानता था और वे  सचमूच एक महामानव थे; अगर वह जीवित होते तो वे हमें उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाने की इजाजत क भी  नहीं देते क्योंकि अपने जीवन में  उन्होंने नाम कमाने का छोटा प्रयास   नहीं किया”, श्री भागवत ने कहा। आज तक में उनके जीवन के आदर्शों से आश्चर्यचकित और प्रभावित हूं, भागवत ने कहा।

एनसीयूआई द्वारा प्रकाशित इनामदार पर किताब और उसके लेखक संतोष कुमार शर्मा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि “इनामदार ने सहकारिता की भावना को जन्म दिया और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से काम किया। यह स्पष्ट था कि सहकारिता का विचार इनामदारजी को आकर्षित करेगा क्योंकि उनके पास लोगों के साथ अनायास ही संबंध जोड़ने की भावना और आत्मियता थी।

भागवत ने गुरूग्राम में लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय आकादमी फॉर कॉपरेटिव रिसर्च और डेवलपमेंट के विचार पर एनसीडीसी और सहकार भारती को धन्यवाद दिया और कहा कि अब समय आ गया है जब आपको अपनी  गतिविधियों में इनामदार जी की सहकारी भावना  का समावेश कर ठोस परिणाम प्राप्त करना चाहिए।

समारोह में भागवत से पहले, सहकार भारती के अध्यक्ष ज्योतिंदर मेहता, केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित कई वक्ताओं ने अपना उद्बोधन दिया। पुरशोत्तम रुपला के अलावा, कई राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मणिपुर और जम्मू और कश्मीर के सहकारिता मंत्री बैठक में उपस्थित थे।

दर्शक दीर्घा  में इफको के प्रबंध निदेशक डॉ यू.एस.अवस्थी, नाबार्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ के.जी.कर्मकार, एनसीयूआई के सीई एन सत्यनारायण और देश-भर के विभिन्न हिस्सों से आए कई प्रमुख सहकारी नेताओं  उपस्थित थे।

सम्मेलन में मेहमानों का स्वागत करते हुए ज्योतिंद्र मेहता ने कहा कि सहकार भारती के संस्थापक के नाम पर प्रमुख संस्थान की स्थापना के साथ हमारी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ गई है। श्रम ही सहकारिता की पूंजी है और एनसीडीसी  की मदद से हम आने वाले समय में निश्चित रूप से आगे बढ़ेंगे, मेहता ने रेखांकित किया। “बहुत पहले ही इनामदार जी ने सहकारिता को गरीब और अमीर के बीच अंतर को भरने का एक उपकरण के रूप में देखा था और उनके इस सपने को पूरा करने का समय आ गया है, मेहता ने कहा।

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह ने सहकार भारती के नेतृत्व की भूमिका की सराहना की और राज्यों में कार्यकर्ताओं के विशाल नेटवर्क को खड़ा करने पर उन्हें बधाई दी। यह एक सच्चे नेता की लिट्मस परीक्षा होती है कि वह अपने अनुयायियों में नेतृत्व गुण पैदा करता है या नहीं," सिंह ने इनामदार की महानता की व्यख्या करते हुए कहा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उत्तरी भाग में सहकारी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए एनसीडीसी और सहकार भारती को आग्रह किया । उन्होंने कहा कि सहकारी आंदोलन महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिणी राज्यों में काफी मजबूत है लेकिन उत्तर भारत में  ये कमजोर है।

इस अवसर पर एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से देश के 222 जिलों को कवर करने हेतु सहकार 22 नाम से एक पत्रिका प्रस्तुत की।

सहकार भारती के राष्ट्रीय सचिव उदय जोशी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सहकार भारती के संरक्षक सतीश मराठे कार्यक्रम के दौरान गतिविधियों को सुचारू रूप से व्यवस्थित करने में सक्रिय दिखे।

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